श्रीमद् भागवत गीता अध्याय 18: मोक्ष संन्यास योग | Bhagwat Geeta Chapter 18
श्रीमद्भागवत गीता का अठारहवां अध्याय “मोक्ष संन्यास योग” कहलाता है। गीता का अठारहवां और अंतिम अध्याय “मोक्ष संन्यास योग” पूरे ग्रंथ का सार प्रस्तुत …
“भागवत गीता” कैटेगरी में हम श्रीमद्भगवद्गीता के अध्यायों, श्लोकों और उनके सरल अर्थों को विस्तृत रूप से प्रस्तुत करते हैं। इस श्रेणी के अंतर्गत गीता के श्लोकों की व्याख्या, आध्यात्मिक संदेश, जीवन प्रबंधन से जुड़ी शिक्षाएं और प्रत्येक श्लोक का भावार्थ सरल भाषा में समझाया गया है। यदि आप भगवद गीता को समझना चाहते हैं या अपने जीवन में इसके सिद्धांतों को अपनाना चाहते हैं, तो यह कैटेगरी आपके लिए बेहद लाभकारी है।
श्रीमद्भागवत गीता का अठारहवां अध्याय “मोक्ष संन्यास योग” कहलाता है। गीता का अठारहवां और अंतिम अध्याय “मोक्ष संन्यास योग” पूरे ग्रंथ का सार प्रस्तुत …
श्रीमद्भागवत गीता का सत्रहवां अध्याय “श्रद्धा त्रय विभाग योग” कहलाता है। गीता के सत्रहवें अध्याय में श्रद्धा के स्वरूप पर प्रकाश डाला गया है। …
श्रीमद्भागवत गीता का सोलहवा अध्याय “देवासुर संपद विभाग योग” कहलाता है। इस अध्याय में भगवान श्रीकृष्ण ने दो प्रकार के स्वभाव — दैवी (divine …
श्रीमद्भागवत गीता का पंद्रहवां अध्याय “पुरुषोत्तम योग” कहलाता है। यह अध्याय मनुष्य जीवन की वास्तविकता, संसार के अस्थायी स्वरूप, आत्मा की अमरता और भगवान …
श्रीमद्भागवत गीता का चौदहवाँ अध्याय “गुण त्रय विभाग योग” कहलाता है। यह अध्याय मानव स्वभाव को प्रभावित करने वाले तीन प्रमुख गुणों – सत्त्व, …
श्रीमद्भागवत गीता का तेरहवां अध्याय “क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग” कहलाता है। इस अध्याय में भगवान श्रीकृष्ण आत्मा (क्षेत्रज्ञ), शरीर (क्षेत्र), परमात्मा और सच्चे ज्ञान …
श्रीमद्भागवत गीता का बारहवाँ अध्याय “भक्तियोग” कहलाता है। जिसमें भक्ति के माध्यम से ईश्वर की प्राप्ति की सरल और प्रभावशाली विधि बताई गई है। …
श्रीमद्भागवत गीता का ग्यारहवें अध्याय “विश्वरूप दर्शन योग” कहलाता है। इस इस ग्रंथ के सबसे रहस्यमय और अद्भुत अध्यायों में से एक …
श्रीमद्भागवत गीता का दसवां अध्याय “विभूति योग” कहलाता है। इस अध्याय में भगवान श्रीकृष्ण अपनी दिव्य विभूतियों (अर्थात् श्रेष्ठ शक्तियों, विशेषताओं और …
श्रीमद्भागवत गीता का नवां अध्याय “राज विद्या योग” कहलाता है। यह गीता का एक अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय है। “राजविद्या” का अर्थ है …