मीरा मंदिर चित्तौड़गढ़ | Meera Temple Chittorgarh

चित्तौड़गढ़ अपने गौरवशाली इतिहास के लिए प्रसिद्ध है, चित्तौड़गढ़ दुर्ग में कई मंदिर स्थित हैं। इनमें से एक है मीरा मंदिर, जो कृष्ण भक्त और कवयित्री मीराबाई और उनके प्रिय भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित है। इस मंदिर में भगवान कृष्ण की मनमोहक मूर्ति स्थित है, इसी मूर्ति के दाई ओर भक्त मीरा बाई की मूर्ति स्थित है। इस मंदिर में भगवान कृष्ण के साथ मीरा बाई की भी पूजा की जाती है। यह मंदिर मीराबाई की अनन्य भक्ति और उनकी कविताओं की अमर विरासत का जीवंत साक्षी है।

मीरा मंदिर चित्तौड़गढ़ (Meera Temple Chittorgarh)

मंदिर का नाम:-मीरा मंदिर चित्तौड़गढ़ (Meera Temple)
स्थान:-चित्तौड़गढ़ किला, चित्तौड़गढ़, राजस्थान
समर्पित देवता:-मीराबाई और भगवान श्रीकृष्ण
निर्माण वर्ष:-16वीं शताब्दी के आसपास
मुख्य आकर्षण:-भगवान कृष्ण और मीरा बाई की मूर्तियाँ
प्रसिद्ध त्यौहार:-मीरा महोत्सव (मीरा जयंती)

मीरा मंदिर चित्तौड़गढ़ का इतिहास

मीरा बाई का जन्म 1498 ईस्वी में कुडकी गांव में दूदा जी के चौथे पुत्र रतन सिंह के घर हुआ था। वह बचपन से ही कृष्णभक्ति में रुचि लेने लगी थीं। वह मेड़ता के राठौड़ वंश की राजकुमारी थीं और मेवाड़ के राणा सांगा के पुत्र महाराणा भोजराज से उनका विवाह हुआ था। विवाह के बाद वे चित्तौड़गढ़ आईं और यहीं उन्होंने अपने इष्टदेव श्रीकृष्ण के प्रति गहरी भक्ति का परिचय दिया था। उनकी सच्ची भक्ति भगवान श्रीकृष्ण के प्रति थी, और वे उन्हें अपना पति मानती थीं।

इतिहासकारों के अनुसार, इस मंदिर का निर्माण 16वीं शताब्दी के आसपास कराया गया था। कहा जाता है कि मीरा बाई इसी मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण के चरणों में लीन होकर भजन गाया करती थीं। मीरा मंदिर एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल भी है, जो इतिहास, धर्म और वास्तुकला में रुचि रखने वाले पर्यटकों को आकर्षित करता है। यह मंदिर चित्तौड़गढ़ की राजपूत विरासत और उनकी गहरी हिंदू आस्था का एक मूर्त प्रमाण है।

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मीरा मंदिर का रखरखाव भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा किया जाता है, जो चित्तौड़गढ़ किले के सभी स्मारकों की देखरेख करता है।

मीरा मंदिर चित्तौड़गढ़ की वास्तुकला और संरचना

मंदिर की वास्तुकला इंडो-आर्यन शैली में बनी है, जो उत्तर भारत में मध्ययुगीन काल में प्रचलित थी। मंदिर के गर्भगृह में भगवान कृष्ण की मूर्ति स्थापित है और यहाँ मीराबाई की प्रार्थना करते हुए एक मूर्ति भी है, जो उनकी भक्ति को दर्शाती है। और एक मंडप जहाँ भक्त पूजा और भजन करते हैं, यह मंडप चारों ओर खुला है और सूक्ष्म नक्काशी वाले स्तंभों से समर्थित है।

मीरा मंदिर चित्तौड़गढ़ में मीराबाई और भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति
मीरा मंदिर चित्तौड़गढ़ में मीराबाई और भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति

मंदिर की दीवारों, स्तंभों और छत पर बारीक चित्रकारी और कथात्मक नक्काशी की गई है। इन नक्काशी में मीरा बाई और श्रीकृष्ण से जुड़ी कथाएँ, छंद और उनकी भक्ति के दृश्य शामिल हैं। मंदिर के प्रवेश द्वार पर एक नक्काशी है, जिसमें पाँच मानव शरीर एक सिर के साथ दिखाए गए हैं, जो सभी जाति-धर्म के लोगों की एकता का संदेश देती है।

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मंदिर के पास एक छोटा क्षेत्र स्वामी रविदास को समर्पित है, जहाँ उनके पदचिन्ह संरक्षित हैं। स्वामी रविदास मीराबाई के गुरु थे। यह क्षेत्र मंदिर की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्ता को बढ़ाता है। मंदिर कुम्भा श्याम मंदिर के परिसर में स्थित है, जो भगवान विष्णु को समर्पित है और एक काले रंग की गरुड़ की मूर्ति है।

मीरा मंदिर चित्तौड़गढ़ तक कैसे पहुचे?

मंदिर का स्थान: मीरा मंदिर राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में चित्तौड़गढ़ किले के अंदर स्थित है। यह किले के अंदर, फतेह प्रकाश पैलेस के पास स्थित है, जो कुम्भा श्याम मंदिर के परिसर का हिस्सा है।

मीरा मंदिर चित्तौड़गढ़ तक पहुँचने के लिए, आप निम्नलिखित विकल्पों का उपयोग कर सकते हैं:

  • हवाई मार्ग: मीरा मंदिर के निकटतम हवाई अड्डा उदयपुर हवाई अड्डा (महाराणा प्रताप हवाई अड्डा) है, जो चित्तौड़गढ़ से लगभग 92 किलोमीटर दूर है। उदयपुर हवाई अड्डे से, आप टैक्सी या बस लेकर चित्तौड़गढ़ पहुँच सकते हैं।
  • रेल मार्ग से: चित्तौड़गढ़ जंक्शन, चित्तौड़गढ़ दुर्ग से लगभग 8 किलोमीटर दूर है। स्टेशन से किले तक पहुँचने के लिए ऑटो-रिक्शा, टैक्सी, या स्थानीय बस का उपयोग कर सकते हैं।
  • सड़क मार्ग: चित्तौड़गढ़ सड़क मार्ग से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है और राष्ट्रीय राजमार्ग NH 48 और NH 76 से होकर गुजरता है। सड़क मार्ग से निजी वाहन या बसों से चित्तौड़गढ़ पहुँच सकते है, चित्तौड़गढ़ पहुँचने के बाद मंदिर चित्तौड़गढ़ दुर्ग में स्थित है। चित्तौड़गढ़ बस स्टैंड से मंदिर तक ऑटो-रिक्शा या पैदल पहुँचा जा सकता है।

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