सोनीजी की नसियां अजमेर: इतिहास, वास्तुकला और यात्रा की पूरी जानकारी

सोनीजी की नसियां राजस्थान के अजमेर में स्थित एक प्रसिद्ध जैन धार्मिक स्थल है। यह मंदिर प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव (आदिनाथ) को समर्पित है। यह मंदिर जैन धर्म की आस्था और भारतीय वास्तुकला का एक नायाब नमूना है। 1865 में निर्मित यह मंदिर अपनी बाहरी लाल पत्थर की संरचना के कारण ‘लाल मंदिर’ कहलाता है। लेकिन इसकी असली पहचान मंदिर के पीछे स्थित ‘स्वर्ण नगरी’ है, जहाँ लकड़ी और सैकड़ों किलो सोने का उपयोग करके जैन पौराणिक कथाओं और अयोध्या नगरी का सजीव चित्रण किया गया है।

सोनीजी की नसियां अजमेर (Soniji ki Nasiyan Ajmer)

मंदिर का नाम:-सोनीजी की नसियां (Soniji ki Nasiyan)
मंदिर का अन्य नाम:-अजमेर जैन मंदिर (Ajmer Jain Mandir)
स्थान:-पृथ्वीराज मार्ग, अजमेर, राजस्थान
समर्पित देवता:-भगवान ऋषभदेव (आदिनाथ)
निर्माण वर्ष:-1864-1865 ईस्वी (निर्माण 10 अक्टूबर 1864 को शुरू, 26 मई 1865 को प्रतिमा स्थापित)
प्रसिद्ध त्यौहार:-महावीर जयंती, पर्युषण पर्व

सोनीजी की नसियां अजमेर का इतिहास

इस मंदिर का निर्माण अजमेर के प्रतिष्ठित जैन व्यवसायी राय बहादुर सेठ मूलचंद सोनी ने करवाया था, अजमेर के प्रतिष्ठित जैन व्यवसायी थे। मंदिर की नींव 10 अक्टूबर 1864 को रखी गई थी। निर्माण कार्य तेजी से चला और 26 मई 1865 को मुख्य गर्भगृह में भगवान आदिनाथ की प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा की गई थी।

मंदिर बनने के बाद, सेठ मूलचंद सोनी के मन में पंच कल्याणक (तीर्थंकर के जीवन की पांच मुख्य घटनाएं) को प्रदर्शित करने का विचार आया। इसके लिए मंदिर के पीछे एक विशाल हॉल का निर्माण किया गया। मॉडलों को बनाने का काम 1870 में जयपुर में शुरू हुआ और इसे पूरा होने में 25 वर्ष लगे और 1895 में यह कार्य पूरा हुआ था।

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दुर्भाग्यवश, सेठ मूलचंद सोनी का 1891 में निधन हो गया, और वे अपने सपनों की ‘स्वर्ण नगरी’ को पूर्ण रूप में नहीं देख सके। उनके पुत्र, सेठ नेमीचंद सोनी ने अपने पिता के कार्य को आगे बढ़ाया और 1895 में इसे जनता के लिए समर्पित किया था।

इन जटिल मॉडलों को जयपुर के कारीगरों द्वारा तैयार किया गया था। पूर्ण होने पर उन्हें पहले जयपुर के एक म्यूजियम हॉल में प्रदर्शित किया गया और बाद में अजमेर लाकर मुख्य मंदिर के पीछे बने विशेष हॉल में स्थापित किया गया था। मंदिर के प्रांगण के मध्य में एक भव्य मानस्तंभ स्थित है, इसका निर्माण 1953 में सेठ सर भागचंद सोनी द्वारा करवाया गया था।

सोनीजी की नसियां अजमेर की वास्तुकला और संरचना

मंदिर को स्थानीय रूप से ‘लाल मंदिर’ कहा जाता है क्योंकि इसका निर्माण करौली से लाए गए लाल बलुआ पत्थर से किया गया है। मंदिर का मुख्य प्रवेश द्वार बेहद भव्य है। इसे अक्सर ‘गोपुरम’ भी कहा जाता है, हालांकि इसकी शैली में राजस्थानी ‘झरोखों’ और मुगल मेहराबों का स्पष्ट प्रभाव दिखता है। इसमें नुकीले मेहराब और बारीक नक्काशी देखने को मिलती है।

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मंदिर के आंगन में प्रवेश करते ही एक 82 फीट ऊंचा ‘मानस्तंभ’ (सम्मान का स्तंभ) दिखाई देता है, जिसका निर्माण सेठ सर भागचंद सोनी द्वारा करवाया गया था। यह सफेद संगमरमर से बना है और इस पर जैन तीर्थंकरों की मूर्तियां उकेरी गई हैं। मुख्य मंदिर तक जाने के लिए संगमरमर की बनी सीढ़ियां हैं। मंदिर के मुख्य गर्भगृह में भगवान आदिनाथ (ऋषभदेव) की मूर्ति स्थापित है, जो सफेद संगमरमर से बनी है। यहाँ केवल जैन धर्मावलंबी ही पूजा-अर्चना के लिए जा सकते हैं।

सोनी जी की नसियां की असली ख्याति इसके मुख्य मंदिर के पीछे स्थित दो मंजिला हॉल के कारण है, जिसे स्वर्ण नगरी कहा जाता है। यह हॉल विशेष रूप से मॉडलों को प्रदर्शित करने के लिए बनाया गया था। इसका आकार लगभग 24.3 मीटर x 12.2 मीटर (लगभग 80 x 40 फीट) है।

हॉल की दीवारों और छतों को बेल्जियम के रंगीन कांच, मोज़ेक के काम और फूलों की पेंटिंग से सजाया गया है। इस हॉल में रखे मॉडलों पर लगभग 1000 किलोग्राम (1 टन) सोने का उपयोग किया गया है। यह सोना लकड़ी की सूक्ष्म नक्काशी पर ‘वर्क’ के रूप में चढ़ाया गया है।

हॉल का एक बड़ा हिस्सा अयोध्या नगरी के पुनर्निर्माण को समर्पित है। इसमें राजा नाभिराय का महल, शहर की चारदीवारी, बाजार, और नागरिकों के घर शामिल हैं। सबसे अद्भुत दृश्य छत से लटके हुए सैकड़ों ‘विमान’ हैं। जैन पुराणों के अनुसार, तीर्थंकर के जन्म के समय स्वर्ग से देवगण विमानों में बैठकर आए थे। इन विमानों को हवा में रस्सियों/तारों के सहारे लटकाया गया है, जिससे उड़ने का भ्रम पैदा होता है। हॉल के केंद्र में सुमेरु पर्वत का विशाल मॉडल है, जो जैन ब्रह्मांड विज्ञान की धुरी है।

यहाँ लकड़ी की बनी विशाल रचनाएँ हैं जिन पर सोने का वर्क चढ़ा है। यह रचनाएँ जैन ब्रह्मांड विज्ञान और भगवान आदिनाथ के जीवन के ‘पंच कल्याणक’ (गर्भ, जन्म, तप, ज्ञान और मोक्ष) को दर्शाती हैं।

सोनीजी की नसियां अजमेर तक कैसे पहुँचें?

मंदिर का स्थान: सोनी जी की नसियां राजस्थान के अजमेर में स्थित है।

मंदिर तक पहुंचने का विकल्प इस प्रकार है:

हवाई मार्ग:

अजमेर तक हवाई मार्ग से पहुँचने के रणनीतिक रूप से दो हवाई अड्डे जयपुर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा और नव विकसित किशनगढ़ हवाई अड्डा है।

  • जयपुर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा: जयपुर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा जो अजमेर से लगभग 135 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, अधिकांश घरेलू और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए प्राथमिक प्रवेश बिंदु बना हुआ है। यह हवाई अड्डा भारत के सभी प्रमुख महानगरों (दिल्ली, मुंबई, बैंगलोर, चेन्नई, कोलकाता) और अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों (जैसे दुबई, मस्कट) से सीधे जुड़ा हुआ है। यह व्यापक नेटवर्क यात्रियों को उड़ान के समय और एयरलाइनों के चयन में लचीलापन प्रदान करता है, जो विशेष रूप से उन तीर्थयात्रियों के लिए महत्वपूर्ण है जो सीमित समय के लिए यात्रा कर रहे हैं। हवाई अड्डे से आप ऑटो, टैक्सी, बस या अन्य स्थानीय परिवहन का उपयोग करके अजमेर पहुँच सकते हैं।
  • किशनगढ़ हवाई अड्डा: किशनगढ़ हवाई अड्डा, जिसे ‘अजमेर हवाई अड्डे’ के रूप में भी जाना जाता है, अजमेर के लिए निकटतम हवाई अड्डा है, जो सोनीजी की नसियां मंदिर से केवल 25 से 26 किलोमीटर की दूरी पर है। भारत सरकार की क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजना (UDAN) के तहत विकसित, यह हवाई अड्डा उन तीर्थयात्रियों के लिए है, जो जयपुर के ट्रैफिक से बचना चाहते हैं। वर्तमान में, यहाँ दिल्ली, हैदराबाद और मुंबई जैसे शहरों से सीमित उड़ानें संचालित होती हैं। हवाई अड्डे से आप ऑटो, टैक्सी, बस या अन्य स्थानीय परिवहन का उपयोग करके अजमेर पहुँच सकते हैं।

रेल मार्ग:

अजमेर जंक्शन उत्तर-पश्चिम भारत के सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशनों में से एक है। यह दिल्ली-अहमदाबाद-मुंबई मुख्य लाइन पर स्थित है, जो इसे देश के लगभग हर हिस्से से जोड़ता है। अजमेर के लिए नई दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई और हैदराबाद से सीधी ट्रेनें उपलब्ध हैं। अजमेर जंक्शन मंदिर से लगभग 1 किलोमीटर दूर है। रेलवे स्टेशन से आप पैदल या ऑटो या अन्य स्थानीय परिवहन का उपयोग करके मंदिर तक पहुँच सकते हैं।

सड़क मार्ग:

मंदिर अजमेर बस स्टेशन से लगभग 1.5 किलोमीटर दूर है। आप पैदल या ऑटो, या अन्य स्थानीय परिवहन का उपयोग करके मंदिर तक पहुँच सकते हैं।


सोनीजी की नसियां के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

  1. सोनी जी की नसिया क्या है?

    अजमेर स्थित सोनीजी की नसियां, जिसे ‘लाल मंदिर’ भी कहा जाता है, भगवान आदिनाथ को समर्पित एक भव्य दिगंबर जैन मंदिर है। लाल पत्थर से बने इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता इसके भीतर स्थित ‘स्वर्ण नगरी’ है, जहाँ लकड़ी की बनी अयोध्या नगरी और सुमेरु पर्वत की विशाल रचनाओं पर लगभग 1000 किलो सोने का काम किया गया है।

  2. सोनीजी की नसियां का निर्माण किसने और कब करवाया था?

    इस मंदिर का निर्माण कार्य 1864 ई. में राय बहादुर सेठ मूलचंद सोनी ने शुरू करवाया था और 1865 में उनके पुत्र ने इसे पूरा करवाया। स्वर्ण नगरी वाला हिस्सा बाद में 1895 में बनकर तैयार हुआ।

  3. स्वर्ण नगरी में कितना सोना इस्तेमाल किया गया है?

    कहा जाता है कि स्वर्ण नगरी हॉल के अंदर बनी संरचनाओं, अयोध्या नगरी के मॉडल और सुमेरु पर्वत की प्रतिकृति को बनाने में लगभग 1000 किलोग्राम सोने का उपयोग किया गया है।

  4. सोनी जी की नसिया कहां पर स्थित है?

    सोनीजी की नसियां राजस्थान के अजमेर (Ajmer) शहर में स्थित है।

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