चामुंडा माता मंदिर राजस्थान के अजमेर जिले के बोराज गांव की अरावली पहाड़ियों में स्थित एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। यह मंदिर माता चामुंडा को समर्पित है। माना जाता है की यह मंदिर 11वीं शताब्दी का है, जिसका निर्माण पृथ्वीराज चौहान ने करवाया था। इसे चौहान वंश की कुलदेवी के रूप में जाना जाता है।
चामुंडा माता मंदिर बोराज (Chamunda Mata Mandir Boraj)
| मंदिर का नाम:- | चामुंडा माता मंदिर बोराज (Chamunda Mata Mandir Boraj) |
| स्थान:- | बोराज गांव, फॉयसागर रोड, अजमेर, राजस्थान (अरावली पहाड़ियों पर, लगभग 1300 फीट ऊंचाई पर) |
| समर्पित देवता:- | माता चामुंडा देवी (चौहान वंश की कुलदेवी) |
| निर्माण वर्ष (अनुमानित):- | लगभग 1100 से अधिक वर्ष पूर्व (9वीं-10वीं शताब्दी ईस्वी के मध्य) |
| निर्माणकर्ता/संरक्षक:- | सम्राट पृथ्वीराज चौहान (तृतीय) और पूर्ववर्ती चौहान शासक |
| प्रसिद्ध त्यौहार:- | चैत्र नवरात्रि, शारदीय नवरात्रि |
चामुंडा माता मंदिर बोराज का इतिहास
ऐतिहासिक स्रोतों और जनश्रुतियों के अनुसार इस मंदिर का निर्माण दिल्ली और अजमेर के अंतिम हिंदू सम्राट पृथ्वीराज चौहान तृतीय (शासनकाल लगभग 1178–1192 ईस्वी) द्वारा करवाया गया था। इस मंदिर की स्थापना लगभग 1,160 वर्ष पूर्व हुई थी। यह कालखंड हमें 9वीं शताब्दी के उत्तरार्ध या 10वीं शताब्दी के आरंभ में ले जाता है, जो अजमेर शहर की स्थापना (1113 ईस्वी में अजयराज द्वितीय द्वारा) से भी पूर्व का समय हो सकता है।
इस मंदिर की सबसे प्रबल ऐतिहासिक पहचान सम्राट पृथ्वीराज चौहान के साथ जुड़ी है। पृथ्वीराज चौहान इस मंदिर के परम भक्त थे। कहा जाता है कि सम्राट पृथ्वीराज किसी भी युद्ध पर निकलने से पूर्व बोराज की पहाड़ियों पर स्थित इस मंदिर में दर्शन करने आते थे, जहां वो माता की विशेष पूजा-अर्चना कर धोक लगाते थे। सम्राट पृथ्वीराज चौहान चामुंडा माता को कुल देवी मानते थे। जहां मंदिर बना है, उसी स्थान पर माता ने सम्राट को दर्शन दिए थे।
चामुंडा माता मंदिर बोराज की वास्तुकला और संरचना
चामुंडा माता मंदिर की वास्तुकला राजपूत और स्थानीय राजस्थानी शैली का मिश्रण प्रतीत होती है। यह मंदिर फॉयसागर झील के पास एक ऊँची पहाड़ी पर स्थित है। यह मंदिर परिसर एक विशाल प्रांगण में फैला हुआ है।
मंदिर के मुख्य गर्भगृह में चामुंडा माता की प्रतिमा प्रतिष्ठित है, इस मूर्ति का केवल सिर (मस्तक) पृथ्वी के बाहर दिखाई देता है, जबकि शेष शरीर धरती के गर्भ में समाया हुआ है। और मंदिर के गर्भगृह के चारों और एक परिक्रमा पथ बना हुआ है। मंदिर के सामने एक खुला स्थान है जहाँ भक्त एकत्र होते हैं और जहाँ विशेष अवसरों पर यज्ञ और आरती का आयोजन होता है।

इस मंदिर परिसर में भैरुजी, भगवान शिव और हनुमान जी के छोटे छोटे मंदिर बने हुए है। मंदिर का सबसे रहस्यमयी और चमत्कारिक पहलू यहाँ स्थित जल कुंड है, जिसे भक्त ‘गंगा मैया’ के नाम से पूजते हैं। स्थानीय लोगों और पुजारियों के अनुसार इस छोटे से कुंड का पानी कभी समाप्त नहीं होता है। यह भी कहा जाता है कि मेलों और उत्सवों के दौरान जब हजारों गैलन पानी उपयोग के लिए निकाला जाता है, तब भी इसका जलस्तर कम नहीं होता है।
चामुंडा माता मंदिर बोराज तक कैसे पहुँचें?
मंदिर का स्थान: यह मंदिर राजस्थान के अजमेर जिले के बोराज गांव की अरावली पहाड़ियों में स्थित है।
मंदिर तक पहुंचने का विकल्प इस प्रकार है:
- हवाई मार्ग:
- किशनगढ़ एयरपोर्ट: यह मंदिर का नजदीकी एयरपोर्ट है, जो मंदिर से लगभग 33-36 किलोमीटर दूर है। हवाई अड्डे से आप ऑटो, टैक्सी, बस या अन्य स्थानीय परिवहन का उपयोग करके मंदिर तक पहुँच सकते हैं। लेकिन इसकी कनेक्टिविटी सीमित है।
- जयपुर एयरपोर्ट: दूसरा विकल्प जयपुर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा है, जो लगभग 140 से 150 किलोमीटर दूर है। यहाँ से भारत के प्रमुख शहरों और कुछ अंतर्राष्ट्रीय शहरों के लिए प्रतिदिन उड़ानें उपलब्ध हैं। हवाई अड्डे से आप ऑटो, टैक्सी, बस या अन्य स्थानीय परिवहन का उपयोग करके मंदिर तक पहुँच सकते हैं।
- रेल मार्ग: इस मंदिर का नजदीकी रेलवे स्टेशन अजमेर जंक्शन है, जो मंदिर से लगभग 8 से 10 किलोमीटर दूर है। रेलवे स्टेशन से आप ऑटो, टैक्सी, बस या अन्य स्थानीय परिवहन का उपयोग करके मंदिर तक पहुँच सकते हैं।
- सड़क मार्ग: यह मंदिर अजमेर शहर से लगभग 10 से 12 किलोमीटर दूर बोराज गांव में स्थित है। अजमेर और आसपास के शहरों से ऑटो, टैक्सी, बस या अन्य स्थानीय परिवहन उपलब्ध हैं।
पहाड़ी की तलहटी तक वाहन जा सकते हैं। इसके बाद मुख्य मंदिर तक पहुँचने के लिए चढ़ाई करनी पड़ती है। बोराज गांव में ठहरने के लिए बड़े होटल उपलब्ध नहीं हैं। यात्री अजमेर शहर या पुष्कर में रुक सकते है। फायसागर रोड या अजमेर शहर के बाहरी इलाकों में कुछ रिसॉर्ट्स और होटल भी मिल सकते हैं।
