आशापुरी माता मंदिर मोदरान | Ashapura Mata Temple Modran Jalore

राजस्थान के जालौर जिले के मोदरान कस्बे में बसा आशापुरी माता मंदिर एक प्राचीन तीर्थस्थल है। यह मंदिर माता दुर्गा के अवतार आशापुरी माता को समर्पित है, जिन्हें चौहान वंश की कुलदेवी के रूप में पूजा जाता है। मोदरान रेलवे स्टेशन के निकट स्थित यह मंदिर न केवल भक्तों के लिए, बल्कि पर्यटकों के लिए भी एक आकर्षक स्थल है।

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आशापुरी माता मंदिर मोदरान (Ashapura Mata Temple Modran Jalore)

मंदिर का नाम:-आशापुरी माता मंदिर (Ashapura Mata Temple)
स्थान:-मोदरान, जालौर जिला, राजस्थान (मोदरान रेलवे स्टेशन के निकट)
समर्पित देवता:-आशापुरी माता (दुर्गा माता का अवतार), चौहान वंश की कुलदेवी
निर्माण वर्ष:-संभवतः 12वीं शताब्दी के आसपास
प्रसिद्ध त्यौहार:-नवरात्रि

आशापुरी माता मंदिर मोदरान का इतिहास

जालोर के सोनगरा चौहानों की शाखा नाडोल से जालोर आई, तो उन्होंने जालोर के पास मोदरान गांव में आशापुरा माता मंदिर की स्थापना की थी, संभवतः 12वीं शताब्दी में।

मोदरान स्थित आशापुरी माता मंदिर से जुड़ी एक प्रचलित कथा सौराष्ट्र के जूनागढ़ के राजा खंगार सुडासमा की पटरानी से संबंधित है। रानी को नौ मास तो क्या, नौ वर्ष बीत जाने के बाद भी प्रसव नहीं हुआ। इसे लेकर राजा-रानी एवं प्रजा दुःखी थे। कई धार्मिक अनुष्ठान किए। सलाह अनुसार, रानी गंगाजी की यात्रा पर निकलीं और रानी ने महोदरा वर्तमान में मोदरान में माताजी के दर्शन के लिए पड़ाव डाला।

रानी ने दैनिक कार्यों से निवृत्त होकर मोदरा माता के दर्शन किए। मां के समक्ष अपनी व्यथा सुनाई। अपने पड़ाव में रात्रि विश्राम के दौरान रानी को मां ने साक्षात दर्शन दिए और कहा कि तुम्हारे राजमहल में अमुक स्थान पर पूतला गढ़ा हुआ है। उसको निकालने पर तुम्हें पुत्र रत्न की प्राप्त होगी। माता ने रानी को इस बात का विश्वास दिलाने के लिए कहा कि इस समय तुमने मेरी ओरण सीमा में रात्रि में विश्राम किया है। उस स्थान पर जहां तुमने घोड़े बांधने के लिए जितनी लकडिय़ों के खूंटू रोपे है, वे सभी दिन उगने तक हरे भरे कदम के वृक्ष बन जायेंगे। यदि ऐसा हो तो तुम मेरा दिया हुआ वचन सच्चा समझना। इतना कहकर महोदरी देवी अदृश्य हो गई थी।

इस बात की सत्यता परखने के लिए रानी ने अपनी सेविकाओं के साथ तालाब के किनारे गाड़े सूखी लकड़ी की खुटियों को देखा तो वह आश्चर्यचकित रह गई। वहां विशाल हरे-भरे कदम के वृक्ष दिखाई दिए। जूनागढ़ में यह समाचार भिजवाया गया। राजा प्रसन्न हुए। पूतले वाली बात पर तय जगह को खुदवाया गया और पूतला निकालवाया तो राजा को पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। राजा अपने पुत्र को देखने के लिए तत्काल मोदरा रवाना हो गए। उन्होंने यहां माता के दर्शन कर मंदिर का जीर्णोद्वार करवाया। राजा ने अपने पुत्र का नाम नवगण रोनेधण रखा जो जूनागढ़ का महाप्रतापी राजा हुआ। राजा की आस पुरी होने के बाद श्री महोदरी माता के उसी दिन से आशापुरी माताजी के नाम से जाने लगा।

यहां स्थापित मूर्ति करीब एक हजार वर्ष पुरानी है। मंदिर प्रांगण में लगे शिलालेख के अनुसार विक्रम संवत 1991 में श्री आशापुरी मंदिर परिसर में वर्षों से चली पशु बलि प्रथा का अंत आम ग्रामवासियों एवं पूर्व जागीरदार श्री धोकलसिंह व भीमसिंह द्वारा श्री तीर्थेन्द्र सूरीश्वरजी म.सा. की प्रेरणा से विक्रम संवत 1991 में आपस में आम सहमति से पशुवध, मदिरा चढ़ाने की प्रथा को पूर्ण रुप से बंद कर दिया गया था।

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मंदिर का नामकरण “आशापुरी” (मनोकामनाएँ पूरी करने वाली) से हुआ, जो उनकी चमत्कारी शक्तियों और भक्तों की आशाओं को पूरा करने की मान्यता को दर्शाता है। जालोर के चौहान शासकों की कुलदेवी आशापुरी देवी का मंदिर जालोर जिले के मोदरान माता यानी बड़े उदर वाली माता के नाम से जाना जाता है।

आशापुरी माता मंदिर मोदरान की वास्तुकला और संरचना

आशापुरी माता मंदिर, जो मोदरान, जालौर जिला, राजस्थान में स्थित है, एक प्राचीन और ऐतिहासिक महत्व का धार्मिक स्थल है। मंदिर मोदरान रेलवे स्टेशन के निकट स्थित है, और इसका स्थान शांत और प्राकृतिक सौंदर्य से घिरा हुआ है। यह मंदिर एक पहाड़ी पर स्थित है, मंदिर परिसर में पहुंचते ही, एक भाग्य प्रवेश द्वार बना हुआ है। प्रवेश द्वार में प्रवेश करते ही माताजी का प्रांगण शुरू हो जाता है, जिसके चारों ओर एक परकोटा बना हुआ है।

उसके बाद कुछ सीढियां चढ़ कर आशापुरी माता के मुख्य मंदिर तक पहुंचा जाता है। जहा पर मंदिर के मुख्य गर्भगृह में माताजी की मूर्ती स्थापित है। और गर्भगृह के बाहर कालाजी गोराजी की मूर्ति स्थापित है। मंदिर के पीछे तालाब बना हुआ है, और वहां पर कई कदम के हरे भरे वृक्ष मोजूद है।

आशापुरी माता मोदरान की मूर्ति
आशापुरी माता मोदरान की मूर्ति

आशापुरी माता मंदिर मोदरान तक कैसे पहुँचें?

मंदिर का स्थान: आशापुरी माता मंदिर, जो मोदरान, जालौर जिला, राजस्थान में स्थित है।

मंदिर तक पहुंचने के विकल्प इस प्रकार हैं:

  • रेल मार्ग: निकटतम रेलवे स्टेशन मोदरान रेलवे स्टेशन (Modran Railway Station) है, जो मंदिर से लगभग 1-2 किलोमीटर दूर है। मोदरान स्टेशन पर उतरने के बाद, आप ऑटो-रिक्शा, टैक्सी, या पैदल चलकर मंदिर तक पहुँच सकते हैं। मंदिर मोदरान स्टेशन रोड पर स्थित है, जो स्टेशन से बहुत नजदीक है, इसलिए पैदल यात्रा भी सुविधाजनक है।
  • सड़क मार्ग: मंदिर सड़क मार्ग से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है, जो इसे निजी वाहन, बसों, और टैक्सी से पहुँचने के लिए उपयुक्त बनाता है। मोदरान राष्ट्रीय राजमार्ग 15 (NH-15) पर स्थित है, जो इसे पास के शहरों और कस्बों से जोड़ता है। प्रमुख शहरों से दूरी निम्नलिखित है:
    • जोधपुर से लगभग 140 किलोमीटर
    • जालौर से लगभग 40 किलोमटर
    • भीनमाल से लगभग 54 किलोमीटर
    • अहमदाबाद से लगभग 260 किलोमीटर
  • हवाई मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा जोधपुर हवाई अड्डा (Jodhpur Airport) है, जो मंदिर से लगभग 140 किलोमीटर दूर है। जोधपुर हवाई अड्डे पर उतरने के बाद, आप टैक्सी या अन्य लोकल ट्रांसपोर्ट सेवाओं का उपयोग करके मोदरान तक पहुँच सकते हैं।

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