बाबा रामदेव मंदिर, मसूरिया, जोधपुर, राजस्थान के एक प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक स्थल है, जो लोकदेवता बाबा रामदेव और उनके गुरु बालीनाथ को समर्पित है। मसूरिया पहाड़ी पर स्थित यह मंदिर अपनी आध्यात्मिक शांति, भव्य वास्तुकला, और भाद्रपद महीने में आयोजित होने वाले विशाल मेले के लिए प्रसिद्ध है। बाबा रामदेव (जिन्हें रामसा पीर या पीरों के पीर के रूप में भी जाना जाता है) को भगवान श्रीकृष्ण का अवतार माना जाता है। यह मंदिर न केवल हिंदू और मुस्लिम भक्तों के लिए एकता का प्रतीक है, बल्कि राजस्थान की समृद्ध लोक परंपराओं और सामाजिक समानता की भावना को भी दर्शाता है।
बाबा रामदेव मंदिर मसूरिया जोधपुर (Baba Ramdev Temple Masuriya Jodhpur)
मंदिर का नाम:- | बाबा रामदेव मंदिर मसूरिया (Baba Ramdev Temple Masuriya) |
स्थान:- | मसूरिया पहाड़ी, जोधपुर, राजस्थान |
समर्पित देवता:- | बाबा रामदेव और उनके गुरु बालीनाथ |
निर्माण वर्ष:- | निश्चित वर्ष अज्ञात (वर्तमान संरचना 19वीं सदी में स्थापित) |
प्रसिद्ध त्यौहार:- | भाद्रपद मेला (भाद्र शुक्ल द्वितीया से दशमी), रामदेव जयंती |
बाबा रामदेव मंदिर मसूरिया जोधपुर का इतिहास
बाबा रामदेव मंदिर, मसूरिया का इतिहास राजस्थान के लोकदेवता बाबा रामदेव और उनके गुरु बालीनाथ की आध्यात्मिक यात्रा से जुड़ा है।
लोकदेवता रामदेवजी का जन्म विक्रम संवत 1409 (सन 1352 ईस्वी) भाद्रपद शुक्ल पक्ष द्वितीया में उण्डुकाश्मीर (बाडमेर) में एक राजपूत परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम राजा अजमल (अजमल तंवर) और उनकी मां का नाम मैणादे था। उनका विवाह अमरकोट (वर्तमान पाकिस्तान) के सोढ़ा राजपूत दलेल सिंह की पुत्री नेतलदे/निहालदे के साथ हुआ था। उनके बड़े भाई का नाम वीरमदेव था। उनके गुरु का नाम बालीनाथ था। बालीनाथजी का धूना (आश्रम) पोकरण में स्थित है, जहाँ बाबा ने अपने बाल्यकाल में शिक्षा प्राप्त की थी।
बाबा रामदेव जी ने भैरव राक्षस का वध इसी आश्रम में किया था। कहा जाता है कि बाबा रामदेव जी कि बहन सुगणा का बेटा बहुत ही चंचल और शरारती था। बाबा रामदेव के भांजे (सुगणा के पुत्र) ने बालीनाथ जी के धूणे में मरा हुआ हिरण डाल दिया। बाबा बालीनाथ इस बात से इतने नाराज हो गए कि वो पोखरण छोड़कर मसूरिया पहाड़ी, जोधपुर आ गए। बाबा रामदेव उन्हें मनाने के लिए कई बार जोधपुर आए लेकिन अपने गुरु को मनाने में असफल रहे। बाबा बालीनाथ यहां आने के बाद मसूरिया पहाड़ी पर एक गुफा में तपस्या करने लगे। उन्होंने कई बरस तक यहाँ तपस्या की और अंत में यहां पर उन्होंने समाधि ले ली।
बाबा बालीनाथ जी की समाधि के बाद यहां एक मंदिर की स्थापना की गई। इस मंदिर में बाबा बालीनाथ के साथ ही उनके रामदेव की भी मूर्ति की स्थापना की गई। इसी के कारण इसे बाबा रामदेव मंदिर मसूरिया कहा जाता है। इस मंदिर में जोधपुर के साथ दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं। मान्यता है कि बाबा रामदेव मंदिर रामदेवरा (बाबा का दरबार) में हाजिरी लगाने से पूर्व मसूरिया में बाबा और उनके गुरु के दर्शन करने से मन्नत जल्द पूरी होती है। मंदिर का निर्माण और रखरखाव श्री पीपा क्षत्रिय समस्त न्याति सभा ट्रस्ट द्वारा किया जाता है।
बाबा रामदेव मंदिर मसूरिया जोधपुर की वास्तुकला और संरचना
बाबा रामदेव मंदिर मसूरिया, जोधपुर की वास्तुकला वास्तुकला समय के साथ विकसित हुई है, इसलिए इसे “सम्मिश्रण कला का प्रतीक” कहा जाता है, जिसमें पारंपरिक राजस्थानी और आधुनिक निर्माण शैलियों का मिश्रण देखा जा सकता है। मंदिर का निर्माण उत्कृष्ट पत्थर की नक्काशी द्वारा किया गया है, जिसमें ‘छीतर’ पत्थर का प्रमुख उपयोग किया गया है। मंदिर मसूरिया पहाड़ी पर स्थित है।
मंदिर का मुख्य गर्भगृह दो खंडों में बंटा हुआ है। नीचे के खंड में बाबा रामदेव की अश्वारोही प्रतिमा (घोड़े पर सवार प्रतिमा) स्थापित है, जो सोने और चांदी से बनी है। यहां बाबा रामदेव के घोड़े की भी एक मूर्ति है, जिसके लिए भक्त चना चढ़ाते हैं। ऊपरी खंड में बाबा रामदेव के गुरु, बालीनाथ जी महाराज की समाधि है, जो एक गुफा के भीतर है। मंदिर तक पहुँचने के लिए चौड़ी और सुव्यवस्थित सीढ़ियाँ हैं। यहाँ दो मुख्य प्रवेश द्वार हैं, एक सामान्य भक्तों के लिए और दूसरा VIP के लिए।
मंदिर परिसर में एक बावड़ी है जिसे परचा बावड़ी कहते हैं। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार इस पानी में स्नान करने से शरीर के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। जिससे यह भक्तों के लिए एक और महत्वपूर्ण स्थान बन जाता है। मंदिर की संरचना पहाड़ी पर होने के कारण प्राकृतिक परिवेश के साथ सामंजस्य स्थापित करती है, और इसकी सादगी और भव्यता इसे भक्तों और पर्यटकों के लिए आकर्षक बनाती है।
बाबा रामदेव मंदिर मसूरिया जोधपुर तक कैसे पहुँचें?
मंदिर का स्थान: बाबा रामदेव मंदिर, मसूरिया, जोधपुर एक प्रमुख धार्मिक स्थल है, जो मसूरिया पहाड़ी पर स्थित है।
मंदिर तक पहुंचने का विकल्प इस प्रकार है:
- हवाई मार्ग: जोधपुर हवाई अड्डा (Jodhpur Airport) मंदिर से लगभग 7-8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। हवाई अड्डे से आप टैक्सी, ऑटो-रिक्शा या अन्य स्थानीय परिवहन का उपयोग करके मंदिर तक पहुँच सकते हैं।
- रेल मार्ग: जोधपुर जंक्शन रेलवे स्टेशन मंदिर से लगभग 4 किलोमीटर दूर है। रेलवे स्टेशन से मंदिर तक पहुँचने के लिए आप टैक्सी, ऑटो-रिक्शा या अन्य स्थानीय परिवहन का उपयोग करके पहुंच सकते हैं।
- सड़क मार्ग: जोधपुर राजस्थान के अन्य शहरों और पड़ोसी राज्यों से सड़क मार्ग से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। आप टैक्सी, बस, या अन्य सड़क परिवहन सेवाएँ लेकर जोधपुर पहुँच सकते हैं। जोधपुर पहुँचने के बाद, आप स्थानीय बस, टैक्सी, या ऑटो-रिक्शा से मंदिर तक पहुँच सकते हैं।
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