भांडासर जैन मंदिर, जिसे सेठ भांडासर जैन मंदिर के नाम से भी जाना जाता है, बीकानेर, राजस्थान में जैन धर्म का एक प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक स्थल है। यह मंदिर 5वें जैन तीर्थंकर सुमतिनाथ को समर्पित है और पुराने बीकानेर के बड़ा बाजार क्षेत्र में, लक्ष्मीनाथ मंदिर के पास स्थित है। मंदिर अपनी अनूठी किंवदंती के लिए प्रसिद्ध है, जिसमें कहा जाता है कि इसका निर्माण पानी की बजाय 40,000 किलो घी से किया गया था। यह मंदिर जैन समुदाय के लिए एक पवित्र स्थल है और पर्यटकों को बीकानेर की समृद्ध कला और इतिहास से जोड़ता है।
भांडासर जैन मंदिर बीकानेर (Bhandasar Jain Temple Bikaner)
मंदिर का नाम:- | भांडासर जैन मंदिर (Bhandasar Jain Temple) |
अन्य नाम:- | सेठ भांडासर जैन मंदिर |
स्थान:- | बीकानेर, राजस्थान (लक्ष्मीनाथ मंदिर के पास) |
समर्पित देवता:- | सुमतिनाथ (5वें जैन तीर्थंकर) |
निर्माण वर्ष:- | 15वीं सदी (1468-1517 ईस्वी, लगभग 50 वर्षों में) |
निर्माता:- | भांडासा ओसवाल (एक धनी जैन व्यापारी) |
प्रसिद्ध त्यौहार:- | महावीर जयंती, पर्युषण पर्व |
भांडासर जैन मंदिर बीकानेर का इतिहास
भांडासर जैन मंदिर का इतिहास 15वीं सदी से शुरू होता है, जब इसे धनी जैन व्यापारी भांडाशाह ओसवाल ने बनवाया था। मंदिर का निर्माण 1468 में शुरू किया गया था, भांडाशाह की मृत्यु के बाद 1514 ईस्वी में उनकी पुत्री द्वारा पूरा किया गया था, जिसमें लगभग 46 वर्ष लगे। यह मंदिर सुमतिनाथ तीर्थंकर को समर्पित है, जो जैन धर्म में पांचवें तीर्थंकर हैं। मंदिर की सबसे रोचक किंवदंती यह है कि इसके निर्माण में पानी की बजाय 40,000 किलो घी का उपयोग किया गया था, जो इसकी अनूठी पहचान बनाता है।
यह मंदिर उस समय बनाया गया जब बीकानेर एक नई रियासत के रूप में उभर रहा था। राव बीका जी ने 1488 में बीकानेर शहर की नींव रखी थी, और यह मंदिर शहर के शुरुआती विकास का हिस्सा था। भांडासा ओसवाल ने इस मंदिर को जैन धर्म के प्रचार, समुदाय को एकजुट करने, और अपनी धार्मिक भक्ति को व्यक्त करने के लिए बनवाया। उस समय बीकानेर में जैन व्यापारियों का प्रभाव बढ़ रहा था, और यह मंदिर उनकी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक बन गया था।
अपूर्ण वास्तुशिल्प महत्वाकांक्षा: 7 मंजिल का सपना
भांडासर जैन मंदिर की कहानी में एक और उल्लेखनीय पहलू इसकी अधूरी वास्तुशिल्प महत्वाकांक्षा है। मूल योजना के अनुसार, इस मंदिर को एक सात मंजिला संरचना के रूप में बनाया जाना प्रस्तावित था, जो उस समय के लिए एक असाधारण और भव्य दृष्टि थी। हालांकि, सेठ भांडाशाह का निधन मंदिर का निर्माण पूरा होने से पहले ही हो गया, और इस कारण यह भव्य योजना अधूरी रह गई। इसके बाद 7 मंजिल के बजाय 3 मंजिल का मंदिर निर्माण कराकर इसकी प्रतिष्ठा करवाई गई थी।
घी की नींव की किंवदंती
भांडासर जैन मंदिर की सबसे प्रसिद्ध और अविश्वसनीय विशेषता इसकी नींव है, जिसके बारे में कहा जाता है कि इसे पानी के बजाय शुद्ध देसी घी से भरा गया था । यह किंवदंती, जो सदियों से चली आ रही है, मंदिर को एक अद्वितीय पहचान देती है और इसे एक चमत्कारी स्थल के रूप में स्थापित करती है। इस असाधारण कार्य के पीछे दो प्रमुख लोककथाएं प्रचलित हैं।
एक कहानी के अनुसार सेठ भांडाशाह जो घी के एक प्रसिद्ध व्यापारी थे, अपनी धन-संपत्ति के बावजूद अपनी कंजूसी के लिए जाने जाते थे। जब वे मंदिर के निर्माण के लिए राजमिस्त्री के साथ चर्चा कर रहे थे, तो एक मक्खी गलती से घी के बर्तन में गिर गई। सेठ ने उस मक्खी को निकालकर अपने जूते पर रगड़ दिया, यह देखकर राजमिस्त्री को लगा कि सेठ बहुत कंजूस हैं। राजमिस्त्री ने सेठ की दानवीरता की परीक्षा लेने के लिए व्यंग्य में कहा कि मंदिर को मजबूत बनाने के लिए पानी की जगह घी का इस्तेमाल करना चाहिए। सेठ ने इसे ईश्वर के प्रति अपनी आस्था का प्रमाण मानते हुए इस असंभव मांग को पूरा करने का फैसला किया और मंदिर के निर्माण के लिए 40,000 किलो घी का प्रबंध करवाया था।
दूसरी कहानी एक अधिक व्यावहारिक और परोपकारी कारण बताती है। बीकानेर का क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से पानी की कमी से ग्रस्त रहा है। जब सेठ ने गांव वालों के साथ मंदिर निर्माण के लिए पानी के उपयोग का विचार साझा किया, तो उन्होंने आपत्ति जताई कि उनके पास पीने के लिए भी पर्याप्त पानी नहीं है। गांव के लोगों की इस दुर्दशा को देखकर, सेठ भांडाशाह ने अपनी भक्ति और परोपकारिता को दर्शाने के लिए मंदिर के निर्माण में पानी के बजाय देसी घी का उपयोग करने का फैसला किया था।
किंवदंती का भौतिक प्रमाण और उसका सांस्कृतिक प्रभाव
किंवदंती को एक दृश्य और अनुभवजन्य आयाम देने के लिए, यह व्यापक रूप से माना जाता है कि बीकानेर की भीषण गर्मी (लगभग 50°C) में मंदिर की दीवारों और फर्श से घी रिसता हुआ देखा जा सकता है, जो उन्हें चिकना बना देता है। हालांकि यह दावा वैज्ञानिक रूप से सिद्ध नहीं हो सका है, यह मंदिर को एक जीवंत किंवदंती के रूप में स्थापित करने के लिए महत्वपूर्ण है। यह लोककथा, वास्तुकला और भौतिक पर्यावरण के बीच एक अद्वितीय त्रिकोणीय संबंध बनाता है। यह विवरण मंदिर को सिर्फ एक ऐतिहासिक स्थल से एक चमत्कारिक स्थल में बदल देता है, जिससे यह देश और विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करने वाला एक प्रमुख केंद्र बन जाता है। यह किंवदंती मंदिर की सांस्कृतिक पहचान को और भी मजबूत करती है।
भांडासर जैन मंदिर बीकानेर की वास्तुकला और संरचना
भांडासर जैन मंदिर अपनी विशिष्ट स्थापत्य कला के लिए प्रसिद्ध है। यह तीन मंजिला संरचना तल से 108 फुट की प्रभावशाली ऊंचाई पर स्थित है। मंदिर का निर्माण लाल बलुआ पत्थर, सफेद संगमरमर और इटालियन संगमरमर जैसी बहुमूल्य सामग्रियों का उपयोग करके किया गया है। मंदिर की बाहरी दीवारें और प्रवेश द्वार जटिल नक्काशी से सजे हैं, जिनमें फूलों के पैटर्न, ज्यामितीय डिजाइन, और जैन पौराणिक चित्र शामिल हैं।
भांडासर जैन मंदिर में पांचवें जैन तीर्थंकर भगवान सुमतिनाथ की मूर्ति स्थापित है। मंदिर की आंतरिक सज्जा उसकी बाहरी भव्यता को और भी बढ़ाती है। इसकी दीवारें, छतें, स्तंभ और फर्श उत्कृष्ट मूर्तियों और चित्रकारी से सुसज्जित हैं। यह मंदिर अपनी उत्कृष्ट भित्तिचित्रों, नक्काशी, सोने के काम और दर्पणों के लिए जाना जाता है। आंतरिक भाग में बीकानेर की दो विशिष्ट कला शैलियों, उस्ता कला (सोने की पेंटिंग) और मथेरण कला (भित्तिचित्र) का अद्भुत प्रयोग हुआ है।

भांडासर जैन मंदिर बीकानेर तक कैसे पहुँचें?
मंदिर का स्थान: भांडासर जैन मंदिर राजस्थान के बीकानेर शहर के बड़ा बाजार क्षेत्र में स्थित है। यह लक्ष्मीनाथ मंदिर के पास स्थित है।
मंदिर तक पहुंचने का विकल्प इस प्रकार है:
- हवाई मार्ग: नाल हवाई अड्डा बीकानेर (Bikaner Airport) मंदिर से लगभग 12 से 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। हवाई अड्डे से आप टैक्सी, बस या अन्य स्थानीय परिवहन का उपयोग करके मंदिर तक पहुँच सकते हैं।
- रेल मार्ग: लक्ष्मीनाथ मंदिर का नजदीकी रेलवे स्टेशन बीकानेर जंक्शन रेलवे स्टेशन मंदिर से लगभग 3 किलोमीटर दूर है। रेलवे स्टेशन से आप ऑटो, टैक्सी या अन्य स्थानीय परिवहन का उपयोग करके मंदिर तक पहुँच सकते हैं। यात्री पैदल भी यह दूरी तय कर सकते हैं।
- सड़क मार्ग: मंदिर बीकानेर बस स्टैंड से लगभग 3 किलोमीटर दूर है। यात्री टैक्सी, बस या अन्य सड़क परिवहन सेवाएँ लेकर बीकानेर पहुँच सकते हैं। बीकानेर पहुँचने के बाद आप स्थानीय टैक्सी या ऑटो-रिक्शा से मंदिर तक पहुँच सकते हैं। बीकानेर NH 62 और NH 89 से जुड़ा है।