जोधपुर शहर के हृदय में स्थित कुंज बिहारी मंदिर एक प्रमुख हिंदू तीर्थ स्थल है। यह भगवान श्रीकृष्ण को उनके कुंज बिहारी स्वरूप में समर्पित है। यह मंदिर अपनी भव्य वास्तुकला, जटिल नक्काशी, और आध्यात्मिक वातावरण के लिए जाना जाता है। कुंज बिहारी, जिसका अर्थ है “वृंदावन की हरियाली में विचरण करने वाले,” भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप और उनकी रसिकता को दर्शाता है। यह मंदिर न केवल भक्तों के लिए एक आध्यात्मिक केंद्र है, बल्कि वास्तुकला प्रेमियों और पर्यटकों के लिए भी एक प्रमुख आकर्षण है।
कुंज बिहारी मंदिर जोधपुर (Kunj Bihari Temple Jodhpur)
मंदिर का नाम:- | कुंज बिहारी मंदिर (Kunj Bihari Temple) |
स्थान:- | जोधपुर राजस्थान |
समर्पित देवता:- | भगवान श्रीकृष्ण (श्री कुंज बिहारी जी या श्रीनाथ जी के रूप में पूजा जाता है।) |
निर्माण वर्ष:- | 1790 (विक्रम संवत 1847) |
प्रसिद्ध त्यौहार:- | जन्माष्टमी, तीज |
कुंज बिहारी मंदिर जोधपुर का इतिहास
कुंज बिहारी मंदिर का निर्माण जोधपुर के तत्कालीन महाराजा विजयसिंह की पासवान (उप-पत्नी) गुलाब राय ने करवाया था। मंदिर का निर्माण विक्रम संवत 1847 में (सन 1790 ईस्वी) में करवाया गया था। यह मंदिर विशेष रूप से गुलाब राय के पुत्र शेर सिंह की स्मृति में बनवाया गया था, जिनकी कम उम्र में मृत्यु हो गई थी।
यह मंदिर पुष्टिमार्गीय परंपरा से जुड़ा है, जो वैष्णव भक्ति का एक महत्वपूर्ण संप्रदाय है, जो भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति और उनकी लीलाओं पर केंद्रित है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, मंदिर में स्थापित भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा को कबूतरों का चौक स्थित सीताराम मंदिर से लाकर यहाँ स्थापित किया गया था, जो मंदिर की ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता को और बढ़ाता है। इस मंदिर का प्रबंधन वर्तमान में राजस्थान सरकार के देवस्थान विभाग द्वारा किया जाता है।
कुंज बिहारी मंदिर जोधपुर की वास्तुकला और संरचना
कुंज बिहारी मंदिर राजस्थानी स्थापत्य कला का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। मंदिर का निर्माण मकराना पत्थर और छित्तर बलुआ पत्थर का उपयोग करके किया गया है। ये सामग्रियां मंदिर को मजबूती और सौंदर्य दोनों प्रदान करती हैं। मंदिर का तोरणद्वार एक ही शिलाखंड से तराशा गया है, जो जटिल नक्काशी से सजा हुआ है।
प्रवेश द्वार पर मीरा बाई की मूर्ति स्थापित है, जो भगवान श्रीकृष्ण की परम भक्त थीं। मीरा बाई की मूर्ति के सामने गर्भगृह में भगवान कृष्ण की मूर्ति स्थापित है। गर्भगृह के ऊपर एक अत्यधिक अलंकृत और जटिल रूप से नक्काशीदार शिखर है, जिसके शीर्ष पर एक कलश स्थापित है। यह शिखर मंदिर की भव्यता में चार चाँद लगाता है और दूर से ही इसकी पहचान कराता है।

मंदिर के गर्भगृह की दीवारों पर नाथद्वारा चित्रशैली के अनूठे कलात्मक भित्ति चित्र बने हुए हैं। इन चित्रों में भगवान कृष्ण और भगवान राम के जीवन प्रसंगों का सजीवता से वर्णन किया गया है। प्राकृतिक रंगों से बने चित्रों में देवकी-वासुदेव विवाह, कृष्ण रास प्रसंग, गीता उपदेश, कृष्ण-सुदामा सखा भाव, गजेन्द्र मोक्ष आदि भागवत प्रसंग बखूबी दीवारों पर उकेरे हुए हैं।
मंदिर में महालक्ष्मी, गायत्री, गणपति, सरस्वती, संतोषी माता, राम, निंबकाचार्य, अजनेश्वर, रामानुजाचार्या व गुरु रामानंद एवं निरंजनी सम्प्रदाय के प्रवर्तक हरि पुरुष दयाल की प्रतिमाएं भी हैं। मंदिर परिसर में पातालेश्वर महादेव का मंदिर भी स्थित है, जिसकी स्थापना ठाकुर जी कुंज बिहारी जी की स्थापना के साथ ही हुई थी।
कुंज बिहारी मंदिर के बगल में अचल नाथ शिवालय भी स्थित है, जिसका निर्माण नानक देवी ने 1531 ईस्वी में करवाया था।
कुंज बिहारी मंदिर जोधपुर का धार्मिक महत्व और अनुष्ठान
कुंज बिहारी मंदिर मुख्य रूप से भगवान कृष्ण को समर्पित है, जिन्हें यहाँ श्री कुंज बिहारी जी या श्रीनाथ जी के रूप में पूजा जाता है। यह मंदिर पुष्टिमार्गीय परम्परा से जुड़ा हुआ है और रामानंदी वैष्णव संप्रदाय का हिस्सा है। ऐसा माना जाता है कि श्री कुंज बिहारी जी का विग्रह कबूतर चौक स्थित श्री सीताराम मंदिर से लाकर स्थापित किया गया था।
मंदिर में प्रतिदिन छह बार आरती की जाती है, जो वैष्णव परंपराओं का पालन करती हैं: मंगला, श्रृंगार, राजभोग, उत्थापन, संध्या, झांकी और शयन। इन समय पर की जाने वाली आरतियों से मंदिर में दिन भर एक पवित्र और आध्यात्मिक वातावरण बना रहता है, जो भक्तों को आकर्षित करता है।
मंदिर में हर तीज त्योहार बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। प्रमुख उत्सवों में जन्माष्टमी, शरद पूर्णिमा, भादवे की तीज, राधाष्टमी, होली, दीपावली, अन्नकूट, रामनवमी, दशहरा और नरसिंह चतुर्दशी शामिल हैं। जन्माष्टमी के दौरान मंदिर विशेष रूप से जीवंत हो उठता है।
कुंज बिहारी मंदिर जोधपुर तक कैसे पहुँचें?
मंदिर का स्थान: कुंज बिहारी मंदिर राजस्थान के जोधपुर शहर में घंटाघर के पास, कटला बाजार, रावतों का बास में स्थित है।
मंदिर तक पहुंचने के विकल्प इस प्रकार है:
- हवाई मार्ग: जोधपुर हवाई अड्डा (Jodhpur Airport) मंदिर से लगभग 4 से 6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। हवाई अड्डे से आप टैक्सी, ऑटो-रिक्शा या अन्य स्थानीय परिवहन का उपयोग करके मंदिर तक पहुँच सकते हैं।
- रेल मार्ग: जोधपुर जंक्शन रेलवे स्टेशन मंदिर से लगभग 2 से 3 किलोमीटर दूर है। रेलवे स्टेशन से मंदिर तक पहुँचने के लिए आप टैक्सी, ऑटो-रिक्शा या अन्य स्थानीय परिवहन का उपयोग करके पहुंच सकते हैं।
- सड़क मार्ग: जोधपुर राजस्थान के अन्य शहरों और पड़ोसी राज्यों से सड़क मार्ग से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। आप टैक्सी, बस, या अन्य सड़क परिवहन सेवाएँ लेकर जोधपुर पहुँच सकते हैं। जोधपुर पहुँचने के बाद, आप स्थानीय बस, टैक्सी, या ऑटो-रिक्शा से मंदिर तक पहुँच सकते हैं।
जोधपुर के अन्य प्रसिद्ध मंदिरो के बारे में पढ़े:-
- महामंदिर जोधपुर
- चामुंडा माता मंदिर जोधपुर
- राज रणछोड़जी मंदिर जोधपुर
- अचल नाथ शिवालय मंदिर जोधपुर
- गणेश मंदिर रातानाडा जोधपुर
- रसिक बिहारी मंदिर जोधपुर
- प्रगट संतोषी माता मंदिर जोधपुर
- बाबा रामदेव मंदिर मसूरिया जोधपुर
- घनश्याम मंदिर जोधपुर
- पाल बालाजी मंदिर जोधपुर
- सच्चियाय माता मंदिर ओसियां जोधपुर
- महावीर जैन मंदिर ओसियां जोधपुर
- सूर्य मंदिर ओसियां जोधपुर