नारेली जैन मन्दिर राजस्थान के अजमेर जिले के नारेली गांव में स्थित एक प्रसिद्ध जैन धार्मिक स्थल है, जो अजमेर से लगभग 10 किलोमीटर दूर है। यह मंदिर भगवान भगवान आदिनाथ (प्रथम तीर्थंकर, ऋषभदेव) को समर्पित है। इस मंदिर को नारेली जैन तीर्थ या श्री ज्ञानोदय तीर्थ क्षेत्र के नाम से भी जाना जाता है।
नारेली जैन मन्दिर अजमेर (Nareli Jain Temple Ajmer)
| मंदिर का नाम:- | नारेली जैन मन्दिर अजमेर (Nareli Jain Temple Ajmer) |
| मंदिर का अन्य नाम:- | श्री ज्ञानोदय तीर्थ |
| स्थान:- | नारेली गांव, अजमेर, राजस्थान |
| समर्पित देवता:- | भगवान आदिनाथ |
| निर्माण वर्ष:- | 1994-1995 |
| निर्माणकर्ता:- | अशोक पाटनी और R.K. मार्बल्स परिवार |
| प्रसिद्ध त्यौहार:- | महावीर जयंती, पर्युषण पर्व |
नारेली जैन मन्दिर अजमेर का इतिहास
इस तीर्थ क्षेत्र की नींव 1994-1995 के मध्य रखी गई थी। R.K. मार्बल्स समूह के अशोक पाटनी और दीनानाथ जैन ने इस मंदिर की परिकल्पना की थी। उनका उद्देश्य केवल एक मंदिर बनाना नहीं था, बल्कि एक ऐसा ‘तीर्थ क्षेत्र’ विकसित करना था जो आने वाली शताब्दियों तक दिगंबर जैन धर्म के सिद्धांतों को प्रतिबिंबित करे।
इस मंदिर के निर्माण का शुभारंभ मुनि श्री सुधासागर जी महाराज के आशीर्वाद से हुआ, जो आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के एक प्रमुख शिष्यों में से एक हैं। शुरुआत में इस मंदिर के निर्माण की अनुमानित लागत लगभग 50 करोड़ रुपये आंकी गई थी। हालांकि, जैसे-जैसे निर्माण आगे बढ़ा और वास्तुकला की भव्यता को वास्तविकता में बदलने का प्रयास किया गया, लागत बढ़कर 100 करोड़ रुपये के पार पहुंच गई थी।
2002 में मंदिर परिसर में अष्टधातु की विशाल प्रतिमाओं को स्थापित किया गया था, और इसकी प्राण प्रतिष्ठा संपन्न हुई थी। मुख्य मंदिर और प्रमुख संरचनाएं पूर्ण हो चुकी हैं, लेकिन नारेली तीर्थ एक “निरंतर विकसित होने वाला” प्रोजेक्ट है। पहाड़ी पर स्थित जिनालयों में नक्काशी और सौंदर्यीकरण का कार्य लगातार चल रहा है।
नारेली जैन मन्दिर अजमेर की वास्तुकला और संरचना
नारेली जैन मंदिर में आधुनिक और पारंपरिक स्थापत्य शैलियों का अनूठा संगम है। मंदिर का आकार थोड़ा कोणीय है और यह समकालीन स्थापत्य शैली का उदाहरण है। मुख्य मंदिर का निर्माण गुलाबी बलुआ पत्थर और संगमरमर से किया गया था। दीवारों पर की गई नक्काशी में जैन पौराणिक कथाओं और शास्त्रों के प्रसंगों को उकेरा गया है, जो आधुनिक बाहरी आवरण के भीतर प्राचीन आत्मा को संजोए हुए है। मंदिर में प्रवेश करने के लिए एक भव्य प्रवेश द्वार बना हुआ है।
मंदिर के मुख्य गर्भगृह में प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ (ऋषभदेव) की विशाल प्रतिमा विराजमान है, यह प्रतिमा पद्मासन (ध्यान मुद्रा) में विराजमान है। यह प्रतिमा लगभग 22 फीट ऊंची है। मंदिर में तीन विशाल धातु की प्रतिमाएं हैं, ये प्रतिमाएं तीर्थंकर अरहनाथ, कुंथुनाथ और शांतिनाथ की हैं। प्रत्येक मूर्ति का वजन लगभग 24 टन है।
नारेली केवल एक एकल भवन नहीं है, बल्कि मंदिरों का एक समूह है जो अरावली पर्वतमाला के साथ एकीकृत है। मुख्य मंदिर के पीछे की पहाड़ी पर 24 छोटे मंदिर बनाए गए हैं। ये 24 मंदिर जैन धर्म के 24 तीर्थंकरों को समर्पित हैं और इन्हें ‘चौबीसी’ या ‘जिनालय’ कहा जाता है।
नारेली जैन मन्दिर अजमेर तक कैसे पहुँचें?
मंदिर का स्थान: नारेली जैन मन्दिर राजस्थान के अजमेर जिले के नारेली गांव में स्थित है, जो अजमेर से लगभग 10 किलोमीटर दूर है।
मंदिर तक पहुंचने का विकल्प इस प्रकार है:
- हवाई मार्ग:
- किशनगढ़ एयरपोर्ट: यह मंदिर का नजदीकी एयरपोर्ट है, जो मंदिर से लगभग 25-30 किलोमीटर दूर है। हवाई अड्डे से आप ऑटो, टैक्सी, बस या अन्य स्थानीय परिवहन का उपयोग करके मंदिर तक पहुँच सकते हैं। लेकिन इसकी कनेक्टिविटी सीमित है।
- जयपुर एयरपोर्ट: दूसरा विकल्प जयपुर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा है, जो लगभग 130 से 135 किलोमीटर दूर है। यहाँ से भारत के प्रमुख शहरों और कुछ अंतर्राष्ट्रीय शहरों के लिए प्रतिदिन उड़ानें उपलब्ध हैं। हवाई अड्डे से आप ऑटो, टैक्सी, बस या अन्य स्थानीय परिवहन का उपयोग करके मंदिर तक पहुँच सकते हैं।
- रेल मार्ग: इस मंदिर का नजदीकी रेलवे स्टेशन अजमेर जंक्शन है, जो मंदिर से लगभग 10 से 15 किलोमीटर दूर है। रेलवे स्टेशन से आप ऑटो, टैक्सी, बस या अन्य स्थानीय परिवहन का उपयोग करके मंदिर तक पहुँच सकते हैं।
- सड़क मार्ग: यह मंदिर मुख्य राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 8 पर स्थित है। अजमेर और आसपास के शहरों से ऑटो, टैक्सी, बस या अन्य स्थानीय परिवहन उपलब्ध हैं। यह मंदिर अजमेर बस स्टेशन से लगभग 10 से 15 किलोमीटर दूर है।
