नीमच माता मंदिर राजस्थान के उदयपुर शहर में स्थित प्रसिद्ध एक धार्मिक स्थल है, जिसे ‘उदयपुर की वैष्णो देवी’ भी कहा जाता है। यह मंदिर फतेह सागर झील के पास एक पहाड़ी क्षेत्र में स्थित है। यह मंदिर देवाली क्षेत्र की एक ऊंची पहाड़ी पर स्थित है, जहां से फतेह सागर झील और उदयपुर का मनोरम दृश्य दिखता है, सूर्योदय और सूर्यास्त के समय यह दृश्य और भी अलौकिक हो जाता है। मंदिर तक पहुँचने के लिए भक्तों को लगभग 900 मीटर लंबी सीढ़ियाँ या ढलान मार्ग तय करना पड़ता है।
नीमच माता मंदिर उदयपुर (Neemach Mata Temple Udaipur)
| मंदिर का नाम:- | नीमच माता मंदिर (Neemach Mata Temple) |
| स्थान:- | देवाली क्षेत्र, उदयपुर, राजस्थान (फतेह सागर झील के पास) |
| समर्पित देवता:- | नीमच माता |
| निर्माण वर्ष:- | लगभग 450 वर्ष पुराना |
| प्रसिद्ध त्यौहार:- | नवरात्रि, दीपावली, हरियाली अमावस्या |
नीमच माता मंदिर उदयपुर का इतिहास
नीमच माता मंदिर की प्रारंभिक पूजा और स्थापना की कहानी एक स्थानीय चरवाहे लिम्बाराम गायरी से जुड़ी हुई है। लिम्बाराम गायरी नियमित रूप से इस पहाड़ी पर भेड़ें और बकरियां चराने के लिए आता था। अपनी भक्ति के रूप में, वह दिनभर का बचा हुआ पानी एक नीम के पेड़ को बड़ा करने के लिए डालता था।
जैसे-जैसे वह पेड़ बड़ा होता गया, माता जी उससे प्रसन्न हुईं और उससे प्रकट हुईं। कहा जाता है कि माता ने लिम्बाराम के सपने में आकर उस स्थान पर एक चबूतरा बनाकर देवी की विधिवत स्थापना करने का आदेश दिया था। यह कथा मंदिर की जड़ों को स्थानीय समुदाय की गहरी आस्था और शुद्ध भक्ति में स्थापित करती है।
मंदिर के नाम ‘नीमच माता’ की उत्पत्ति स्थानीय वनस्पति और लोक मान्यता से जुड़ी हुई है। पहाड़ी पर बड़ी संख्या में नीम के पेड़ मौजूद हैं। लोक कथा यह बताती है कि माता जी का प्राकट्य (प्रकट होना) इसी स्थान पर एक नीम के पेड़ से हुआ था, जिसके कारण इस मंदिर का नाम नीमच माता मंदिर रखा गया था।
नीमच माता मंदिर का दैवीय महत्व मुख्य रूप से गर्भगृह में स्थापित मूर्ति के चमत्कारी स्वरूप परिवर्तन की मान्यता पर टिका है। यह दृढ़ विश्वास है कि माता की मूर्ति दिन में तीन अद्भुत स्वरूप धारण करती है। माता की प्रतिमा सुबह में बाल्यावस्था, दोपहर में युवावस्था और शाम को वृद्धावस्था का रूप धारण कर लेती है।

नीमच माता मंदिर उदयपुर की वास्तुकला और संरचना
नीमच माता मंदिर की वास्तुकला साधारण है, फिर भी मजबूत संरचना है। मंदिर के मुख्य गर्भगृह में नीमच माता की एक पत्थर की मूर्ति प्रतिष्ठित है। भक्तों को मंदिर तक पहुँचने के लिए फतेहसागर झील के पास से देवाली क्षेत्र से लगभग 800 से 900 मीटर की खड़ी पैदल चढ़ाई करनी पड़ती थी।
पहाड़ी मार्ग की इस कठिनाई को दूर करने और मंदिर को अधिक सुलभ बनाने के लिए 22 जनवरी 2024 को श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए रोपवे की सुविधा शुरू की गई थी। रोपवे के निर्माण ने बुजुर्गों और स्वास्थ्य कारणों से दर्शन से वंचित रह जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए बड़ी सुविधा प्रदान की है।
यह मंदिर ऊंची पहाड़ी पर होने के कारण फतेह सागर झील और उदयपुर का मनोरम दृश्य दिखता है, सूर्योदय और सूर्यास्त के समय यह दृश्य और भी अलौकिक हो जाता है।
नीमच माता मंदिर तक कैसे पहुँचे?
मंदिर का स्थान: नीमच माता मंदिर राजस्थान के उदयपुर शहर के देवाली क्षेत्र में फतेह सागर झील के पास एक ऊंची पहाड़ी पर स्थित है।
मंदिर तक पहुंचने का विकल्प इस प्रकार है:
- हवाई मार्ग: महाराणा प्रताप हवाई अड्डा (Udaipur Airport) मंदिर तक पहुँचने के लिए निकटतम हवाई अड्डा है, जो मंदिर से लगभग 25 से 26 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। हवाई अड्डे से आप ऑटो रिक्शा, टैक्सी या अन्य स्थानीय परिवहन से मंदिर तक पहुंच सकते हैं। मंदिर तक पहुंचने के लिए आप रोपवे या पैदल सीढियों से पहुंच सकते हैं।
- रेल मार्ग: उदयपुर रेलवे स्टेशन मंदिर तक पहुँचने के लिए निकटतम रेलवे स्टेशन है, जो मंदिर से लगभग 7 से 8 किलोमीटर दूर है। रेलवे स्टेशन से आप ऑटो रिक्शा, टैक्सी या अन्य स्थानीय परिवहन से मंदिर तक पहुंच सकते हैं। मंदिर तक पहुंचने के लिए आप रोपवे या पैदल सीढियों से पहुंच सकते हैं।
- सड़क मार्ग: मंदिर उदयपुर बस स्टैंड के केंद्र से लगभग 6 से 7 किलोमीटर दूर है। उदयपुर राजस्थान के अन्य शहरों और पड़ोसी राज्यों से सड़क मार्ग से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है, और टैक्सी, बस, या अन्य सड़क परिवहन सेवाएँ आसानी से उपलब्ध हैं।
