पिपलेश्वर महादेव मंदिर सिरोही | Pipleshwar Mahadev Mandir Sirohi

सिरोही, राजस्थान के अरावली पहाड़ियों की गोद में बसा पिपलेश्वर महादेव मंदिर एक प्राचीन और पवित्र शिव मंदिर है। यह मंदिर वेराविलपुर क्षेत्र में सिरोही-शिवगंज मार्ग पर राष्ट्रीय राजमार्ग से लगभग 1.5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। भगवान शिव को समर्पित यह मंदिर अपनी प्राकृतिक गुफा, निरंतर बहने वाले झरने, और शांत वातावरण के लिए प्रसिद्ध है। स्थानीय रूप से झरने को “गंगा” के नाम से जाना जाता है, जो मंदिर की पवित्रता को और बढ़ाता है।

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पिपलेश्वर महादेव मंदिर सिरोही (Pipleshwar Mahadev Mandir Sirohi)

मंदिर का नाम:-पिपलेश्वर महादेव मंदिर (Pipleshwar Mahadev Mandir)
स्थान:-वेराविलपुर, सिरोही-शिवगंज मार्ग, सिरोही जिला, राजस्थान
समर्पित देवता:-भगवान शिव (पिपलेश्वर महादेव)
निर्माण वर्ष:-प्राचीन काल (सटीक वर्ष अज्ञात)
मुख्य आकर्षण:-प्राकृतिक गुफा में शिवलिंग, निरंतर बहने वाला झरना, हवन कुंड, तपस्या स्थल
प्रसिद्ध त्यौहार:-सावन मास और महाशिवरात्रि

पिपलेश्वर महादेव मंदिर सिरोही का इतिहास

पिपलेश्वर महादेव मंदिर, सिरोही जिले के वेराविलपुर क्षेत्र में अरावली पहाड़ियों की तलहटी में स्थित एक प्राचीन शिव मंदिर है। इस मंदिर का इतिहास पौराणिक कथाओं और स्थानीय मान्यताओं से गहराई से जुड़ा है। माना जाता है कि मंदिर की स्थापना गैनजी महाराज नामक एक तपस्वी ऋषि ने पौराणिक काल में की थी। स्थानीय किंवदंतियों के अनुसार, गैनजी महाराज ने इस प्राकृतिक गुफा में वर्षों तक कठोर तपस्या की थी। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने यहाँ प्रकट होकर गुफा को पवित्र किया था। इस घटना ने मंदिर को एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक स्थल के रूप में स्थापित किया था।

मंदिर के पास निरंतर बहने वाला झरना, जिसे स्थानीय लोग “गंगा” कहते हैं, इसकी पवित्रता को और बढ़ाता है। आधुनिक काल में, पिपलेश्वर महादेव मंदिर का रखरखाव स्थानीय प्रशासन और मंदिर समिति द्वारा किया जाता है। हाल के वर्षों में, भक्तों और पर्यटकों की सुविधा के लिए मंदिर तक पहुंचने वाले रास्तों और सीढ़ियों का निर्माण किया गया है। इन सुधारों ने मंदिर को अधिक सुलभ बनाया है, लेकिन इसकी प्राकृतिक संरचना और शांत वातावरण को संरक्षित रखा गया है। मंदिर का एकांत और शांतिपूर्ण वातावरण इसे तपस्वियों और ध्यान करने वालों के लिए आदर्श बनाता है।

मंदिर के आसपास का क्षेत्र वन्यजीवों, जैसे तेंदुए और भालू, का निवास स्थान है, लेकिन स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, ये जानवर भक्तों को कभी नुकसान नहीं पहुँचाते। यह मंदिर की आध्यात्मिक शक्ति और पवित्रता की मान्यता को और मजबूत करता है।

पिपलेश्वर महादेव मंदिर सिरोही की वास्तुकला और संरचना

पिपलेश्वर महादेव मंदिर की वास्तुकला इसकी प्राकृतिक गुफा और न्यूनतम मानव निर्मित संरचनाओं के कारण अनूठी है। यह मंदिर अरावली पहाड़ियों की एक प्राकृतिक गुफा में स्थित है, जो इसे अन्य मंदिरों से अलग बनाता है।

  • प्राकृतिक संरचना: मंदिर का मुख्य गर्भगृह एक प्राकृतिक गुफा में है, जिसमें एक शिवलिंग स्थापित है। गुफा का स्वरूप सादा लेकिन आध्यात्मिक है, जो ध्यान और भक्ति के लिए उपयुक्त है।
  • झरना और कुंड: मंदिर के पास एक निरंतर बहने वाला झरना है, जिसे स्थानीय लोग गंगा कहते हैं। यह झरना गुफा के पास एक छोटे कुंड में एकत्र होता है, जो मंदिर की पवित्रता को बढ़ाता है।
  • हवन कुंड और तपस्या मंदिर: गुफा के बाहर एक हवन कुंड है, जहाँ सावन और महाशिवरात्रि के दौरान विशेष अनुष्ठान होते हैं। पहाड़ी पर एक छोटा तपस्या मंदिर भी है, जो तपस्वियों और साधकों के लिए समर्पित है।
  • प्राकृतिक सौंदर्य: मंदिर चारों ओर हरी-भरी पहाड़ियों, घने जंगलों, और शांत वातावरण से घिरा है। झरने की मधुर ध्वनि और पक्षियों का चहचहाना मंदिर के शांतिपूर्ण माहौल को और बढ़ाता है।

पिपलेश्वर महादेव मंदिर सिरोही तक कैसे पहुँचें?

मंदिर का स्थान: पिपलेश्वर महादेव मंदिर, सिरोही जिले के वेराविलपुर क्षेत्र में, मोछल गांव के पास अरावली पहाड़ियों में स्थित एक प्राचीन शिव मंदिर है।

पिपलेश्वर महादेव मंदिर, सिरोही तक पहुंचने के विकल्प:

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  • हवाई मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा उदयपुर का महाराणा प्रताप हवाई अड्डा है, जो सिरोही से लगभग 178 किलोमीटर दूर है। उदयपुर से सिरोही तक टैक्सी या बस से पहुंचा जा सकता है। सिरोही शहर से मंदिर तक टैक्सी या ऑटो-रिक्शा लिया जा सकता है।
  • रेल मार्ग: निकटतम रेलवे स्टेशन सिरोही रोड (पिंडवाड़ा रेलवे स्टेशन) है, जो सिरोही शहर से लगभग 10 किलोमीटर दूर है। स्टेशन से सिरोही शहर तक टैक्सी या ऑटो-रिक्शा उपलब्ध हैं। सिरोही से मंदिर तक की यात्रा टैक्सी या ऑटो-रिक्शा से की जा सकती है।
  • सड़क मार्ग: सिरोही राष्ट्रीय राजमार्ग 62 और अन्य राजमार्गों से अच्छी तरह जुड़ा है। आप टैक्सी, ऑटो-रिक्शा, या निजी वाहन से मंदिर पहुंच सकते हैं।

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