सांवरिया सेठ मंदिर, जो चित्तौड़गढ़ जिले के मंडफिया गाँव में स्थित है। भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप सांवलिया सेठ को समर्पित यह मंदिर भक्ति, चमत्कार और समृद्धि का प्रतीक है। इसे वैष्णव संप्रदाय में श्रीनाथजी के बाद दूसरा प्रमुख धाम माना जाता है। व्यापारी सांवरिया सेठ को अपना “बिजनेस पार्टनर” मानते हैं, और भक्त इसे मनोकामनाएँ पूर्ण करने वाला मंदिर मानते हैं।
सांवरिया सेठ मंदिर मंडफिया (Sanwariya Seth Temple Mandafia)
| मंदिर का नाम:- | सांवरिया सेठ मंदिर मंडफिया (Sanwariya Seth Temple Mandafia) |
| स्थान:- | मंडफिया, चित्तौड़गढ़, राजस्थान |
| समर्पित देवता:- | भगवान श्रीकृष्ण (सांवलिया सेठ स्वरूप) |
| निर्माण वर्ष:- | 1840 (मूर्ति की खोज) |
| मुख्य आकर्षण:- | कृष्ण मूर्ति |
| प्रसिद्ध त्यौहार:- | जन्माष्टमी, जलझूलनी एकादशी, अन्नकूट, |
सांवरिया सेठ मंदिर मंडफिया का इतिहास
मंडफिया में स्थित सांवरिया सेठ मंदिर एक प्रसिद्ध हिंदू मंदिर है जो भगवान कृष्ण को समर्पित है। यह मंदिर श्री सांवलिया सेठ के नाम से भी जाना जाता है। वैष्णव संप्रदाय के अनुयायियों के लिए, इस मंदिर का महत्व श्रीनाथ जी नाथद्वारा के बाद दूसरे स्थान पर आता है। मंदिर की स्थापना की कहानी 1840 की एक किंवदंती से जुड़ी है। ऐसा माना जाता है कि उस समय भोला राम गुर्जर नामक एक दूधवाले को सपना आया जिसमें उसने तीन दिव्य मूर्तियों को जमीन में दबे हुए देखा था।
यह सपना भादसोड़ा-बागुंड गांव के छापर में एक बबूल के पेड़ के नीचे दबी मूर्तियों के बारे में था। सपने के बाद, ग्रामीणों ने उस स्थान पर खुदाई की और भगवान कृष्ण की तीन सुंदर मूर्तियाँ पाईं, जो ठीक वैसी ही थीं जैसा कि भोला राम ने सपने में देखा था। इनमें से एक मूर्ति मंडफिया में स्थापित की गई थी, दूसरी भादसोड़ा में, और तीसरी को उसी स्थान पर स्थापित किया गया जहाँ वह मिली थी।
शुरू शुरू में एक साधारण मंदिर होने के बावजूद, समय के साथ सांवलिया जी के तीनों मंदिर दूर-दूर तक प्रसिद्ध हो गए और बड़ी संख्या में भक्त इन पवित्र स्थलों के दर्शन के लिए आने लगे थे। मंडफिया में स्थापित मूर्ति को विशेष रूप से काफी लोकप्रियता मिली थी। भक्तों की लगातार बढ़ती संख्या के कारण, मंदिर का कई बार विस्तार और नवीनीकरण किया गया।
मंदिर के प्रबंधन का इतिहास भी कई चरणों से गुजरा है। वर्ष 1956 में, श्री सांवलियाजी मंदिर प्रबंधकारिणी समिति का विधिवत पंजीकरण किया गया था। इस समिति में मंडफिया और आसपास के 16 गांवों के 65 सदस्यों को शामिल किया गया था, जिसका उद्देश्य मंदिर के मामलों को सुव्यवस्थित ढंग से संचालित करना था। लेकिन 3 दिसंबर 1991 को, राजस्थान सरकार ने मंदिर की बढ़ती लोकप्रियता और आय को देखते हुए इसे अपने नियंत्रण में ले लिया था और श्री सांवलियाजी मंदिर मंडल के नाम से एक बोर्ड की स्थापना की थी। वर्तमान में, यह मंदिर राजस्थान सरकार के अधीन है।
आधुनिक मंदिर का निर्माण कई चरणों में हुआ था। 1961-62 में, भक्तों की बढ़ती संख्या को समायोजित करने के लिए, पुराने कच्चे मंदिर के स्थान पर एक विशाल और पक्का मंदिर बनाया गया था। इसके बाद, 1980-84 में इस विशाल मंदिर में कांच का बहुत ही सुंदर और आकर्षक काम किया गया, जिससे मंदिर की सुंदरता और बढ़ गई। 1996 में, मंदिर बोर्ड ने उदयपुर के नगर नियोजन विभाग की सहायता से मंदिर परिसर का और विस्तार करना शुरू कर दिया, ताकि भक्तों को और अधिक सुविधाएँ प्रदान की जा सकें। मंदिर की वर्तमान वास्तुकला पारंपरिक राजस्थानी शैली को दर्शाती है।
सांवरिया सेठ से जुड़ी भक्तों की गहरी आस्था और मान्यताएं इस मंदिर को एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल बनाती हैं। भक्त मानते हैं कि सांवरिया सेठ के दरबार में आने मात्र से ही उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। हजारों भक्त प्रतिदिन भगवान कृष्ण के पवित्र दर्शन के लिए इस मंदिर में आते हैं। वैष्णव संप्रदाय के अनुयायियों के लिए इस मंदिर का विशेष महत्व है।
सांवरिया सेठ को व्यापार और समृद्धि के देवता के रूप में भी पूजा जाता है। बहुत से व्यापारी सांवरिया सेठ को अपना व्यापारिक भागीदार मानते हैं और अपने व्यवसाय से होने वाले लाभ का एक निश्चित हिस्सा उन्हें अर्पित करते हैं। ऐसा माना जाता है कि ऐसा करने से उनके व्यापार में वृद्धि होती है और उन्हें अधिक लाभ मिलता है। व्यापारिक समुदाय के बीच सांवरिया सेठ की यह विशेष मान्यता उन्हें समृद्धि और सफलता के देवता के रूप में स्थापित करती है।
कुछ किंवदंतियों के अनुसार, मीरा बाई, जो भगवान कृष्ण की एक महान भक्त थीं, ने उसी गिरधर गोपाल की पूजा की थी जो सांवरिया सेठ हैं। यह भी माना जाता है कि मीरा बाई ने इन मूर्तियों की पूजा गिरधर गोपाल के रूप में की थी। मीरा बाई, जो भगवान कृष्ण की एक महान भक्त थीं, का सांवरिया सेठ मंदिर से संभावित संबंध इस स्थल के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व को और भी अधिक बढ़ाता है।
इसके अतिरिक्त, यह माना जाता है कि ये मूर्तियाँ संत दयाराम के दल से संबंधित थीं। औरंगजेब के शासनकाल के दौरान हुए धार्मिक उत्पीड़न के समय, मूर्तियों को आक्रमणकारियों से बचाने के लिए जमीन में छिपा दिया गया था। ऐसा कहा जाता है कि संत दयाराम के समूह ने भगवान की प्रेरणा से बागुंड गांव के पास एक बरगद के पेड़ के नीचे इन मूर्तियों को छिपाया था। संत दयाराम का मूर्तियों से संबंध मंदिर के इतिहास को मुगल काल से जोड़ता है और आक्रमणों से मूर्तियों को बचाने के प्रयासों को दर्शाता है।
सांवरिया सेठ मंदिर मंडफिया की वास्तुकला और संरचना
सांवरिया सेठ मंदिर, मंडफिया की वास्तुकला पारंपरिक राजस्थानी शैली को दर्शाती है। मंदिर का मुख्य आकर्षण इसका ऊंचा ‘शिखर’ है, जो दूर से ही दिखाई देता है।
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मंदिर परिसर में एक भव्य और विशाल मंदिर है, जिसे पुराने मंदिर के स्थान पर बनाया गया है। साल 2000 से, मंदिर का पुनर्निर्माण अक्षरधाम की तर्ज पर शुरू हुआ, जिसकी अनुमानित लागत 50 करोड़ रुपये है। मंदिर की दीवारों पर आकर्षक और जटिल नक्काशी की गई है, जो राजस्थानी कला और शिल्प कौशल का उत्कृष्ट उदाहरण है।
मुख्य मंदिर में भगवान कृष्ण की काले पत्थर की एक सुंदर मूर्ति स्थापित है, जिसमें उन्हें बांसुरी बजाते हुए दर्शाया गया है। मंदिर में भक्तों के लिए एक बड़ा हॉल है जहाँ वे प्रार्थना और दर्शन कर सकते हैं। मंदिर परिसर में भक्तों के ठहरने के लिए धर्मशाला भी बनी हुई है।

सांवरिया सेठ मंदिर मंडफिया तक कैसे पहुँचें?
मंदिर का स्थान: सांवरिया सेठ मंदिर मंडफिया गाँव में स्थित है, जो चित्तौड़गढ़ जिले के भादेसर पंचायत समिति में आता है, और चित्तौड़गढ़-उदयपुर राजमार्ग (हाईवे) पर है।
मंदिर तक पहुंचने के परिवहन विकल्प इस प्रकार है:
- हवाई मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा डबोक, उदयपुर है, जो मंदिर से लगभग 65 किलोमीटर दूर है। वहाँ से टैक्सी या किराए की कार लेकर मंदिर तक पहुँचा जा सकता है, जो लगभग 1.5-2 घंटे का समय लेता है।
- रेल मार्ग-श्री सांवरिया सेठ मंदिर का निकटतम रेलवे स्टेशन चित्तौड़गढ़ जंक्शन है, जो मंदिर से 35-40 किमी दूर है और 40-45 मिनट में पहुचा जा सकता हे। वहाँ से टैक्सी, बस, या ऑटो के माध्यम से मंदिर तक आसानी से पहुँचा जा सकता है। अन्य विकल्पों में निम्बाहेड़ा (मंदिर से लगभग 40 किलोमीटर), कपासन (मंदिर से लगभग 35 किलोमीटर) या उदयपुर स्टेशन (मंदिर से लगभग 80 किलोमीटर) हैं, लेकिन चित्तौड़गढ़ सबसे सुविधाजनक और नजदीक है।
- सड़क मार्ग: सड़क मार्ग से आप बसों या अपने निजी वाहनों से चित्तौड़गढ़ पहुंच सकते है, और चित्तौड़गढ़ पहुँचने के बाद, मंडफिया तक स्थानीय बसें या टैक्सियाँ उपलब्ध हैं। चित्तौड़गढ़ की दूरी मंडफिया से लगभग 35-40 किलोमीटर है, जो 45-50 मिनट में तय की जा सकती है।
सांवरिया सेठ मंदिर मंडफिया के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
- सांवरिया सेठ का मंदिर कहां स्थित है?
सांवरिया सेठ का प्रसिद्ध मंदिर राजस्थान राज्य के चित्तौड़गढ़ जिले में मंडफिया नामक स्थान पर स्थित है, जो चित्तौड़गढ़-उदयपुर राजमार्ग (हाईवे) पर है।
- मंडफिया कोनसे जिले में है?
मंडफिया गाँव राजस्थान राज्य के चित्तौड़गढ़ जिले में स्थित है।
- चित्तौड़गढ़ से सांवरिया सेठ कितने किलोमीटर है?
चित्तौड़गढ़ से सांवरिया सेठ मंदिर (मंडफिया) की दूरी लगभग 42 किलोमीटर है।
- सांवरिया सेठ मंदिर निकटतम रेलवे स्टेशन कौनसा है?
सांवरिया सेठ मंदिर निकटतम रेलवे स्टेशन चित्तौड़गढ़ जंक्शन है, जो मंदिर से लगभग 41 किलोमीटर दूर है।
